किडनी रोगियों के लिए खान-पान


किडनी के मरीजों में से लगभग एक चौथाई में किडनी में गड़बड़ी का कोई सटीक कारण ज्ञात नहीं है। डायबिटीज के रोगियों की बड़ी तादाद किडनी की बीमारी से ग्रसित है, वहीं दूसरी और किडनी की बीमारी से ग्रस्त एक तिहाई लोग डायबिटीज पीड़ित होते हैं। इससे एक बात साफ होती है कि इन दोनों का आपस में गहरा संबंध है। लंबे समय तक हाईपरटेंशन का शिकार रहे लोगों को भी किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

किडनी की बीमारी के लिए दूषित खान-पान और वातावरण को मुख्य कारण माना जाता हैं। गंदा मांस, मछली, अंडा, फल, भोजन और गंदे पानी की सेवन किडनी की बीमारी की वजह वन सकता है। बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और वाहनों के कारण पर्यावरण प्रदूषण बढ़ गया हैं। भोजन और पेय पदार्थों में भी कीटाणुनाशकों, रासायनिक खादों, डिटरजेंट, साबुन, औद्योगिक रसायनों के अंश पाएं जाते हैं। ऐसे में फेफड़े और जिगर के साथ ही किडनी भी सुरक्षित नहीं हैं। किडनी के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं और उन्हें इन बीमारियों का सामना करना पड़ता है जैसे - 
एक्यूट किडनी समस्याएं - एक्यूट किडनी समस्याएं बहुत ही तेजी से होती है, लेकिन इलाज के बाद अधिकांश मामलों में यह परेशानी ठीक हो जाती हैं और किडनी आराम से काम करती है।
क्रोनिक किडनी समस्याएं - क्रोनिक किडनी की बीमारी आम हैं। ये तब होती हैं जब किडनी खराब हो या तीन माह या इससे अधिक समय से काम नहीं कर रही हो। इसका अगर ठीक प्रकार से इलाज न हो तो क्रोनिक समस्या बढ़ती जाती हैं। वृक्क रोग में क्रोनिक किडनी रोग के पांच चरण होते हैं। किडनी समस्या के अंतिम चरण में किड़नी केवल 15% ही कार्य कर पाती है।     
किडनी की बीमारी होने के मुख्य कारण -
किडनी की बीमारी के लिए गलत खानपान और दूषित वातावरण को जिम्मेदार ठहराया जाता है। यह किडनी में परेशानी का कारण एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक सेवन भी होता है। डायबिटीज रोगियों को किडनी की शिकायत आम लोगों की तुलना में अधिक होती है। बढ़ता औद्योगीकरण और शहरीकरण भी किडनी रोग का कारण बन रहा है। साथ ही किडनी की बीमारी के अन्य कारण कुछ इस प्रकार है जैसे – 
सही मात्रा में पानी न पीना 
खाने में ज्यादा नमक खाना 
मीठा अधिक खाना 
पेशाब को रोकना
शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी होना
एनिमल प्रोटीन का अधिक मात्रा में सेवन करना
नींद पूरी न होना
कॉफी अधिक पीना
अधिक एंटीबायोटिक्स लेना
अधिक धूम्रपान और शराब पीना   
किडनी की बीमारी के लक्षण – 
हाथ, पैरों व आंखों के नीचे सूजन
कमजोरी और थकान महसूस होना
शरीर पर खुजली होना
बार-बार पेशाब का आना
भूख न लगना या कम लगना
उल्टी व उबकाई आना
पैरों की पिंडलियों में खिंचाव होना
पेशाब करते समय प्रोटीन के साथ रक्त का आना
तंद्रा
किडनी रोग में खान-पान 
एक स्वस्थ आहार लेने से किडनी रोग से पीड़ित होने का खतरा कम हो सकता है। हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि, एक दशक में छह लाख 30 हजार से अधिक लोगों की आहार संबंधी आदतों का विश्लेषण किया। तब पता चला कि, जो लोग आहार प्रोसेस्ड मीट, नमक और कोल्ड ड्रिंक्स से अधिक फल, सब्जियां और मछलियों का सेवन करते हैं। उनमें क्रोनिक किडनी रोग विकसित होने की संभावना 30 प्रतिशत कम थी। इस स्थिति में एक हल्के लक्षण, कम विकार से लेकर किडनी फेल्योर तक हो सकती है। जहां अंग बिल्कुल काम नहीं करती है, इसलिए स्वस्थ आहार लेने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। साथ ही यह परिणाम सीकेड के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य रोकथान कार्यक्रमों को विकसित करने में मदद कर सकते हैं, जो बीमारी के बोझ को कम करने में फायदेमंद साबित होते हैं। तो चलिए जानते हैं किडनी रोग में फायदेमंद फल और सब्जियां।
गोभी - गोभी में फाइटोकेमिकल्स (phytochemical) और एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants) भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो कि फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले नुकसान को रोकता है। इसमें पोटेशियम कम होने की वजह से यह डायलिसिस के मरीज के लिए फायदेमंद है। गोभी को कच्चा या पका कर भी खा सकते हैं।
बेरीस - बेरीस में मैंगनीज, विटामिन-सी, फाइबर और फोलेट काफी मात्रा में पाए जाते हैं, जो कि किडनी को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।
पत्ता गोभी – पत्ता गोभी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे विटामिन सी, विटामिन के और विटामिन बी। इसमें इंडोल्स जैसे सूजनरोधी घटक होते हैं और यह फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत है। इसी के साथ मसली हुई पत्ता गोभी को आप आलू की जगह पर भी खा सकते हैं, क्योंकि इसमें पोटेशियम कम मात्रा में होता है। आप इसकी सब्जी बनाकर या सलाद के रूप में भी खा सकते हैं। 
अंडे का सफेद भाग - अंडे का सफेद भाग किडनी को ठीक रखने के लिए काफी मदद करता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है, जो किडनी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। आप केवल अंडे के सफेद भाग का आमलेट बनाकर खाएं और उबले हुए अंडे से पीले भाग को निकाल के ही खाएं।
जैतून का तेल - किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जैतून का तेल काफी फायदेमंद रहा है। इसमें मौजूद ओलेक एसिड और एंटी-इन्फ्लेमेरी फैटी एसिड हमारे शरीर में ऑक्सीडेशन को कम करता है। आप इसमें अपना भोजन पका कर भी खा सकते हैं।
प्याज – खाने में प्याज डालने से स्वाद आता है, इसमें सल्फर घटक होता है, जिसकी वजह से प्याज में तेज गंध आती है, लेकिन प्याज फ्लवोनोइड्स से समृद्ध होती है। खासकर कुअरसिटिन से यह एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट है जो दिल रोग को दूर करता है और कई प्रकार के कैंसर से बचाता है। प्याज में पोटेशियम कम होता है और यह क्रोमियम का अच्छा स्त्रोत है। इसमें एक ऐसा खनिज है जो कार्बोगाइड्रेट, फैट और प्रोटीन मेटाबॉलिज्म में मदद करता है। आप अलग-अलग प्रकार की प्याज का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे – सफेद, ब्राउन, लाल आदि।     
स्ट्रॉबेरी - आप स्ट्रॉबेरी खाना पसंद करते हैं, तो अपने दैनिक आहार में स्ट्रॉबेरी के कुछ पीसेज का सेवन कर सकते हैं या आप इसका शेक बनाकर भी पी सकते हैं। स्ट्रॉबेरी में एंटी-इंफ्लेमेटरी में एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी होती है, जो आपके बॉडी सेल्स को प्रोटेक्ट करती है। 
लाल अंगूर - लाल अंगूर खून के प्रवाह को बढ़ाते हैं और किडनी के कामकाज की सुविधा को ठीक रखते हैं। साथ ही यह पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखती है और किडनी डिसऑर्डर की समस्या से छुटकारा मिलना जैसे कई फायदे होते हैं, इसलिए लाल अंगूर का सेवन स्वस्थ्य के लिए फायदेमंद होता हैं।
क्रैनबेरी - क्रैनबेरी में एसिडिक तत्व होते हैं, जो बैक्टीरिया को मूत्राशय में प्रवेश नहीं करने देते हैं। सूखें क्रैनबेरी या क्रैनबेरी के रस का सेवन करने से ह्रदय की समस्याओं से निजात मिलता है। 
लहसून - लहसून में पाएं जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट किडनी और हार्ट प्रॉब्लम की संभावना को कम करता है। दिन में एक या दो कच्चा लहसून की कलियों का सेवन करने से शरीर हाई कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
लाल शिमला मिर्च - लाल शिमला मिर्च खाने से किडनी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसमें विटामिन ए, बी-6 और सी, फोलिक एसिड और फाइबर से भरपूर होता है।
सेब - सेब में मौजूद फाइबर किडनी को साफ करने में काफी मदद करता है। इसके सेवन से हार्ट प्रॉब्लम्स, कैंसर और कोलेस्ट्रॉल कम होने की संभावना बढ़ती है।
किडनी की देखभाल के कुछ सुझाव – 
स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें और रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, जितना हो सके शराब का सेवन, धूम्रपान, तला हुआ भोजन, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड भोजन से बचें।
हर साल किडनी की जांच जरूर कराएं। समय पर निदान और उपचार किडनी की बीमारियों को रोकने और उनका इलाज करने में मददगार हो सकता है। 
सभी देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि, किडनी रोगियों को दवाइयां सहित सभी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। 
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए बेहतर जीवन के साथ अपने खान-पान का भी ध्यान रखें और कोशिश करें कि, बाहर का खाना और अन्हेल्दी चीजें न खाएं।  
किडनी रोगी खान-पान के परहेज के साथ अपनाएं आयुर्वेदिक उपचार - 
भारत का प्रसिद्ध किडनी उपचार केंद्र कर्मा आयुर्वेदा, जहां किडनी की बीमारियों का आयुर्वेदिक इलाज किया जाता है। यह सन् 1937 में धवन परिवार द्वारा स्थापित किया गया था और आज इसका नेतृत्व डॉ. पुनीत धवन कर रहे हैं। कर्मा आयुर्वेदा में सिर्फ आयुर्वेदिक उपचार पर भरोसा किया जाता है। साथ ही डॉ. पुनीत धवन ने सफलतापूर्वक और आयुर्वेदिक उपचार की मदद से 35 हजार से भी ज्यादा मरीजों का इलाज करके उन्हें रोग मुक्त किया है, वो भी डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के बिना। 
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां अपने सुंगंधित या औषधीय गुणों के लिए भोजन, स्वाद, दवा या सुगंध के लिए इस्तेमाल होती है। यह जड़ी-बूटियां पेड-पौधे के हरे पत्ते या फूलों वाले हिस्से को संदर्भित करती हैं, जबकि मसालें पौधो के अन्य भागों से बने होते हैं, जिसमें बीज, छोटे फल, जड़ और फल शामिल होते हैं। जड़ी-बूटियों के अनेक औषधीय व अध्यात्मिक इस्तेमाल होती हैं। यह जड़ी-बूटी के सामान्य इस्तेमाल पर पाक संबंधी जड़ी-बूटियां और औषधीय जड़ी-बूटियां और औषधीय जड़ी-बूटियां अलग है।
आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके दवा बनाई जाती है, जिसमें किडनी रोगियों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक दवाओं में वरूण, कासनी, गोखरू, पुनर्नवा और शिरीष जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं जो रोग को जड़ से खत्म करने में मदद करती हैं। किडनी की सभी बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक उपचार सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हुई है। आयुर्वेद ने दुनिया भर की मानव जाति के संपूर्ण, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास किया है। आपके शरीर का सही संतुलन प्राप्त करने के लिए वात, पित्त और कफ को नियंत्रित करती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति लंबे जीवन का विज्ञान है और दुनिया में स्वास्थ्य की देखभाल की सबसे पुरानी प्रणाली है।



Comments

Popular posts from this blog

14 Tips & Tricks To Help You Manage Excessive Gas

शरीर में किडनी कहां होती है?

What causes renal diseases? How to stop the spreading?