किडनी कैंसर रोधी खाद्य पदार्थ


किडनी कैंसर आपकी किडनी में शुरू होता है, जो मुट्ठी के आकार के बराबर होती है और आपकी रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पेट के अंगों के पीछे स्थिति होती है। वयस्कों में रीनल से कार्सिनोमा (carcinoma) किडनी के कैंसर का सबसे आम प्रकार है। किडनी कैंसर के अन्य कम सामान्य प्रकार हो सकते हैं। छोटे बच्चों को विल्म्स ट्यूमर (Wilms tumor) नामक किडनी कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। साथ ही किडनी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि, इमेजिंग तकनीकों जैसे कि कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (Computerized tomography) यानी सीटी स्कैन अधिक बार इस्तेमाल किया जाना। इन जांच से किडनी कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। इसे कम करने के लिए हमें अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए।

किडनी कैंसर के लिए जरूरी आहार -

कैंसर रोगियों का लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फलियों से बना संतुलित आहार, आवश्यक विटामिन और मिनरल कैंसर से लड़ने में सहायका कर सकते हैं। किडनी कैंसर से बचने के लिए कुछ खाद्य पदार्थ जैसे – 
·         लहसून और प्याज - लहसून और प्याड में मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी आंत, स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकों को मार देते हैं। लहसून ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है। यह इंसुलिन उत्पादन को कम करके शरीर में ट्यूमर नहीं होने देता है।
·         सब्जियां - फूलगोभी और ब्रोकोली शरीर  में दो ताकतवर कैंसर रोधी अणु होते है। यह दोनों डिटोक्सीफिकेसन एंजाइम के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जो कैंसर की कोशिकाओं को मारते हैं और ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है। और ये फेफड़े प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए भी जाने जाते हैं।
·         अदरक - ताजे अदरक में कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने वाले कुछ खास गुण होते हैं और ट्यूमर की कोशिकाओं को रोकने के लिए मदद करते हैं। अदरक का अर्क कीमोथेरेपी (Extract chemotherapy) या रेडियोथेरेपी (Radiation therapy) से होने वाली परेशानी को भी कम कर सकता है।·         हल्दी - यह सबसे शक्तिशाली और फायदेमंद प्राकृतिक कैंसर रोधी है। यह कैंसर कोशिका को मारकर द्यूमर को बढने से रोकती है और साथ ही कीमोथेरेपी (chemotherapy) का असर बढ़ाती है। काली मिर्च के साथ तेल में मिलने पर हल्दी और भी अधिक असरकारी हो जाती है।
·         पपीता, कीनू और संतरे - यह फल विटामिन और ऐसे तत्वों से भरपूर होते हैं, जो लीवर में पाए जाने वाले कार्सनोजन को अपने आप खत्म हो जाने के लिए मजबूर करते हैं। कीनू और उसके छिल्के में फ्लेवनोइड्स और नोबिलेटिन नामक तत्व होते हैं, जिसमें कैंसर कोशिकाओं को रोकने की क्षमता हैं।
·         गाजर, आम और कद्दू - अल्फा और बीटा नाम का कैरोटीन्स कैंसर को खत्म करने वाले शक्तिशाली कारक के रूप में जाने जाते हैं। यह तीनों फल गर्भाशय, मूत्राशय, पेट और स्तन कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर की रोकथाम में असरदार है।

· लास अंगूर खाएं - यह एंथोसायनिन और पुलीफेनल्स की मदद से शरीर से कैंसर के कणों का उत्पादन कम करने में मदद करता है।

·         टमाटर और तरबूज - यह लाइकोपीन का अच्छा स्त्रोत हैं, जिसे एक बेहद मजबूत एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। यह सेलुलर क्षति से सुरक्षा प्रदान करता है। एक सप्ताह के दौरान टमाटर को भोजन के दसवें भाग के रूप में खाने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा लगभग 18 फीसदी कम हो जाता है।
·         फलियां और दाल - दाल और फलियां प्रोटीन का एक समृद्ध स्त्रोत होने के अलावा फाइबर और फोलेट प्रदान करते हैं जो पैनक्रियाज के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। फलियां में प्रतिरोधी स्टार्च होता है, जो बड़ी आंत की कोशिकाओं के स्वास्थ्य रखने में मदद करते हैं। 

किडनी कैंसर के स्टेज -
किडनी कैंसर के निम्नलिखित चार स्टेजे हैं –
·         पहला स्टेज - इस स्टेज का मतलब है कि, ट्यूमर 7 से.मी. (2 3/2) से कम माप का है और किडनी तक ही सीमित है।
·         दूसरा स्टेज - दूसरे स्टेज का अर्थ है कि, ट्यूमर का माप 7 से.मी यानी की एक टेनिस के बराबर से अधिक है और यह किडनी तक ही सीमित है।
·         तीसरा स्टेज - इस स्टेज का अर्थ है कि, ट्यूमर किसी भीव आकार का हो सकता है। यह किडनी से लेकर आस-पास के ऊतकों तक फैल गया है और यह क्षेत्रीय लिम्फ नोड्स में भी फैला हुआ हो सकता है। साथ ही ट्यूमर प्रमुख नसों या अधिवृक्क ग्रंथि में मौजूद है और किडनी व अधिविक्क ग्रंथि के आस-पास वाले रेशेदार ऊतक के भीरत है।
·         चौथा स्टेज - चौथा स्टेज का मतलब है कि, ट्यूमर किडनी और किडनी व अधिवृक्क ग्रंथि के आस-पास वाले रेशेदार ऊतक के बाहर फैल गया है या यह कई लसीका नोड्स या शरीर के दूर के अंग जैसे हड्डियों, मस्तिष्क, लीवर या फेफड़ों में फैल गया है।  
किडनी कैंसर के कारण -
कैंसर तब शुरू होता है जब कोशिकाओं की डीएनए (DNA) संरचना में परिवर्तन होता है। आनुवंशिक परिवर्तन की वजह से कोशिकाएं अनियंत्रित हो जाती है, जो अंत में ट्यूमर की कोशिकाएं बनती है ऐसा क्यों होता है इसका पता अभी तक नहीं चला है।
किडनी कैंसर के जोखिम कारक –
·         उम्र में बड़े लोगों को किडनी के कैंसर का जोखिम अधिक होता है
·         महिलाओं के मुकाबले पुरूषों को किडनी कैंसर का अधिक जोखिम होता है
·         लंबे समय से धूम्रपान करना
·         हाई ब्लड प्रेशर रहना
·         मोटापे से ग्रस्त होना
·         पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से ग्रस्त होना
·         कार्यस्थल में विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना
किडनी कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले कुछ अनुवांशिक कारण भी होते हैं, जैसे वॉन हिप्पल-लिंडु रोग और अनुवांशिक पैपिलरी रीनल सेल कार्सिनोमा।
किडनी कैंसर मुख्य लक्षण -   
कुछ मामलों में लोगों को किडनी कैंसर के प्रारंभिक दौर में कोई लक्षण नहीं होते हैं जैसे-जै, ट्यूमर बड़ा होता है तो आपको निम्नलिखित में से एक या उससे अधिक हो सकते हैं
·         यूरिन में रक्त आना
·         शरीर में एक तरफ या पेट में गाठ होना 
·         शरीर के एक तरफ दर्द होना और ठीक न होना
·         भूख न लगना
·         किसी भी कारण के बिना वजन कम होना
·         ठंड या किसी अन्य इंफेक्शन के बिना बुखार होना और कई सप्ताह तक रहना
·         अत्यधिक थकान होना
·         एनीमिया
·         आपकी एडियों या पैरों में सूजन आना
शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता हुआ किडनी कैंसर निम्नलिखित लक्षण पैदा कर सकता है जैसे –
·         सांस फूलना
·         खांसी में रक्त आना
·         हड्डियों में दर्द होना
किडनी कैंसर के अन्य लक्षण –
·         पीठ के निचले हिस्से में दर्द - वैसे तो पीठ के दर्द का सामान्य माना जाता है, लेकिन यह किडनी कैंसर का लक्षण हो सकता है। जी हां, अधिकांश लोग बीमारी के बढ़ने के बाद पीठ के निचले हिस्से पर दर्द का अनुभव करते हैं। यह दर्द आमतौर पर बेहद तेज होता है, जिससे व्यक्ति को बहुत सी असुविधा हो सकती है।
·         शरीर में रक्त की कमी - किडनी की लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को भी नियंत्रित करता है। किडनी के कैंसर से लाल रक्त कोशिकों का उत्पादन कम हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को एनीमिया की शिकायत हो सकती है। एनीमिया की वजह से आप अधिक समय थकावट महसूस कर सकते है।
·         तेजी से वजन घटना - यदि आपके कोशिश किए बिना तेजी से वजन कम हो रहा है, तो  चिताजनक विषय है। यह किडनी कैंसर का संकेत है। जैसे ही ट्यूमर फैलता है आपको कम भूख लग सकती है, जिससे आपको कम खाना पड़ेगा और इससे आपका वजन कम हो सकता है।  
किडनी कैंसर से करें बचाव -
·         धूम्रपान करना किडनी कैंसर का कारण बन सकता है, इसलिए धूम्रपान न करना किडनी कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।
·         मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। फलों और सब्जियों से समृद्ध भोजन करना, व्यायाम करना, हाई ब्लड प्रेशर का इलाज करवाना और एक स्वस्थ वजन बनाए रखने से किडनी कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।
·         अपने कार्यस्थल पर हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने से बचें।

किडनी कैंसर की जांच -
किडनी कैंसर का निदान निम्नलिखित जांच से किया जाता है जैसे –
·         यूरिन जांच - यूरिन जांच आपके यूरिन में रक्त या किडनी कैंसर के अन्य लक्षणों का पता लगाता है।
·         रक्त जांच - रक्त जांच ये बताते हैं कि, आपके किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं।
·         इंट्रावीनस पायलोग्राम (आईवीपी) आईवीपी में चिकित्सक एक हाई को आपके शरीर में इंजेक्ट करते हैं जो आपके यूरिन पथ में जाती है और किसी भी ट्यूमर को एक्स-रे में दिखा देती है।

·         अल्ट्रासाउंड - अल्ट्रासाउंड में आपकी किडनी की तस्वीर बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। यह जांच बता सकता है कि क्या ट्यूमरव ठोस है या तरल पदार्थ से भरा हुआ है।

·         सीटी स्कैन - सीटी स्कैन में एक्स-रे और एक कंप्यूटर का इस्तेमाल कर के आपकी किडनी की विस्तृत तस्वीरें की एक श्रृंख्ला की जाती है। इसके लिए हाई का इंजेक्शन भी दिया जा सकता है।

·         एमआरआई स्कैन - आपके शरीर में ऊतकों की विस्तृत छवियां बनाने के लिए चुंबकीय और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

·         रीनल आर्टीरिओग्राम - इस जांच का इस्तेमाल आपके ट्यूमर को खून की आपूर्ति का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल अक्सर नहीं किया जाता है। लेकिन छोटे-छोटे ट्यूमर का निदान करने में इस जांच से मदद मिल सकती है।

किडनी में खराबी का आयुर्वेदिक उपचार –
आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जो हर रोग को जड़ से खत्म करने में मदद करती है। कर्मा आयुर्वेदा में किडनी का आयुर्वेदिक उपचार किया जाता है और यह भारत का एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक किडनी उपचार केंद्र है। कर्मा आयुर्वेदा अस्पताल सन् 1937 में धवन परिवार द्वारा स्थापित किया गया था और आज इसका नेतृत्व डॉ. पुनीत धवन कर रहे हैं। डॉ. पुनीत धवन ने सफलता के साथ 35,000 से अधिक मरीजों का इलाज करके उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी से छुटकारा दिलाया है। साथ ही, जिन लोगों को डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट करवाने की नौबात आ गई थी उन्हें भी इन दर्दनाक प्रक्रियाओं से मुक्त किया है।



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