मधुमेह से किडनी फेल्योर


मधुमेह से किडनी फेल्योर 


भागती जिंदगी और काम के बोझ के तले आजकल हम अपने शरीर का ठीक रूप से ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। जिसके कारण हमारा शरीर बिमारियों के लिए किसी धर्मशाला की भांति बन चूका है। हर दूसरा आदमी किसी न किसी रोग से ग्रस्त है। लेकिन कुछ बीमारियां है जो अब आम बन चुकी है। जैसे -"मधुमेह"। मधुमेह ऐसी बीमारी है जो मरते दम तक आपके साथ रहती है, साथ ही एक बार होने पर इसका असर  शरीर के बाकि दूसरे अंगों पर भी पड़ता है। हालांकि इस रोग का असर एक दम से बाकि अंगों पर दिखाई नहीं पड़ता। हाँ, अगर रक्त में मीठे की मात्रा अपने अधिकतम स्तर पर पहुंच जाएं तो 5 -10 साल में इससे दूसरे अंग भी प्रभावित होने शुरू हो जातें है। जिसके कारण किडनी फेल हो सकती है।
मधुमेह है क्या?
जब शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन (एक प्रकार का हार्मोन) पहुंचना कम हो जाता है, तो खून में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है, ऐसी स्थिति को डाइबिटीज़ कहते हैं। इंसुलिन का काम शरीर में भोजन को एनर्जी में बदलना होता है और इसी हार्मोन की वजह से शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है। वहीं, जब किसी को मधुमेह हो जाता है, तो भोजन के एनर्जी में बदलने में दिक्कत होती है, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। डायबिटीज़ का असर न सिर्फ शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है, बल्कि इसकी वजह से शरीर में कई अन्य बीमारियां भी घर कर जाती हैं। 
बिमारियों का घर मधुमेह :-
मधुमेह एक जानलेवा बीमारी है। क्योंकि अकेले मधुमेह एक साथ हमारे शरीर में कई अन्य बिमारियों को अपने साथ रखती है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह हो जाएं तो यह कहना गलत नहीं होगा की वह व्यक्ति मधुमेह के साथ-साथ और भी कई बीमारी से लड़ रहा है।  मधुमेह के कारण गुर्दे में, आंखों में, पैर की नसों में कुछ खराबी आ सकती है। दिल की बीमारी के बढ़ने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसके कारण लकवा होने और पैर में रक्त संचार बाधित होने का खतरा अधिक रहता है। 
मधुमेह के कारण सबसे खतरनाक होने वाली बीमारी है "किडनी का ख़राब होना" यानि "कडनी फेल्योर"। बता दें की मधुमेह के कारण जो किडनी की समस्या होती है उसे डायाबिटिक किडनी डिजीज कहते हैं। इसका मेडिकल शब्द डायाबिटिक नेफ्रोपौथी है। साथ ही इसके कारण अगर कोई आर्टरी ब्लॉक होती है तो हार्ट अटैक हो सकता है। इसके अलावा ब्रेन में भी रक्त की सप्लाई बाधित होने से ब्रेन स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति अचानक से नहीं आती है बल्कि यह 10 साल पुराने इतिहास के कारण होता है। इसके अलावा माइक्रोवैस्कुलर संबंधित समस्यायें होने लगती है, यह किडनी से संबंधित है, अगर यह हो जाये तो उपचार मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह आंखों को भी प्रभावित करती है।
मधुमेह के प्रकार :-
आम लोगो की धारणा में मधुमेह सिर्फ एक प्रकार का ही होता है। जोकि 'वंशानुगत' हैं अर्थात पिता या माता (कोई पूर्वज) को मधुमेह की शिकायत है तो उनके बच्चों को भी मधुमेह हो सकता है। लेकिन आपको बता दें की मधुमेह तीन प्रकार का होता है, जिसे हम टाइप 1,टाइप 2  और गर्भावधि मधुमेह कहते हैं। जो निम्नलिखित हैं।
टाइप 1 –  यानि इंसुलिन डीपेन्डेन्ट डायाबिटीज (IDDM-Insulin Dependent Diabetes Mellitus) साधारणतः कम उम्र में होनेवाले इस प्रकार के डायाबिटीज के उपचार में इंसुलिन की जरूरत पडती है। इस प्रकार के डायाबिटीज में बहुत ज्यादा अर्थात 30 से 35 प्रतिशत मरीजों की किडनी खराब होने की संभावना रहती है। इस मधुमेह में मरीज़ को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि शरीर में इंसुलिन की मात्रा सही तरीक़े से बनी रहे। यह डायबिटीज़ बच्चों और युवाओं को होने की आशंका ज़्यादा होती है।
टाइप 2 – यानि की  नॉन- इंसुलिन डीपेन्डेन्ट डायाबिटीज (N।I।D।D।M।-Non-Insulin Dependent Diabetes Mellitus) डायाबिटीज के अधिकतर मरीज इसी प्रकार के होते हैं। वयस्क (Adults) मरीजों में इसी प्रकार की डायाबिटीज होने की संभावनाएँ ज्यादा होती हैं, जिसे मुख्यतः दवा की मदद से नियंत्रण में लिए जा सकता है। इसी प्रकार के डायाबिटीज के मरीजों में 10 से 40 प्रतिशत मरीजों की किडनी खराब होने की संभावना रहती है।इसमें शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है या फिर शरीर सही तरीके से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता।
गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes) –  गर्भावधि मधुमेह गर्भवती महिला और उनके होने वाले बच्चे को हो सकता हैं। जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस दौरान, गर्भवती महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा ज़्यादा रहता है। इसमें माँ को मधुमेह होने की ज्यादा संभावना होती हैं।
मधुमेह के लक्षण :-
कहते हैं की हर दोषी को अपनी गलती सुधारने का एक दूसरा मौका जरूर दिया जाता हैं। इसी प्रकार हमारा शरीर भी रोगो की चपेट में आते समय कई संकेत देता हैं। जिससे हम यह जान सके की हमें कोई रोग लग चूका हैं हमें अब अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरुरत हैं। ठीक इसी प्रकार मधुमेह होने के समय पर भी हमारे शरीर में इसके कई लक्षण दिखाई देते हैं। जिनकी पहचान कर हम इसे होने से रोक सकते हैं। नीचे हम ऐसे ही कुछ मधुमेह के लक्षण आपको बता रहे हैं।
बार-बार पेशाब लगना 
लगातार शरीर में दर्द की शिकायत होना 
बार-बार त्वचा और प्राइवेट पार्ट्स में संक्रमण होना या कैविटी होना 
चोट लगने पर घाव का जल्दी न भरना 
लगातार पानी पीने पर भी गला सूखना या बार-बार प्यास लगना 
आंखों की रोशनी कमज़ोर होना 
वज़न में अचानक बदलाव होना, अचानक से ज़्यादा बढ़ना या कम होना 
लगातार थकान या कमज़ोरी महसूस होना 
ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगना 
व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना 
मधुमेह से किडनी ख़राब होने के कारण और लक्षण :-
मूलतः हमारी किडनी रक्त साफ़ करने का कार्य करती हैं। एक स्वस्थ किडनी में प्रत्येक मिनट में 1200 मिली लीटर खून प्रवाहित होकर शुद्ध होता है। किडनी ख़राब होने के पीछे मधुमेह सबसे बड़ा कारण हैं। क्योंकि, मधुमेह नियंत्रण में न होने के कारण जानलेवा रक्त हमारी किडनियों में बहता रहता हैं। जिसे साफ़ करने के लिए हमारी किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता हैं। यदि लम्बे समय तक ऐसा ही चलता रहे तो हमारी किडनी पर काम का बोझ पड़ने के कारण वह फेल यानि ख़राब हो जाती हैं। डायालिसिस कराने वाले हर तीन मरीजों में से एक मरीज की किडनी खराब होने का कारण डायाबिटीज होता है।
मधुमेह से हमें आसानी से किडनी रोग हो सकता हैं जिसके निम्न कारण हैं -
मधुमेह कम उम्र में हुआ हो या लम्बे समय से इस रोग से जूझ रहे हो 
उपचार करने में इंसुलिन की अधिक आवश्यकता 
रक्त में लगातार मीठे की अधिक मात्रा होना, संतुलन में ना होना 
पेशाब में प्रोटीन और बढ़ा हुआ सीरम लिपिड डायाबिटिक आना  
मोटापा, धूम्रपान और शराब का सेवन 
परिवारिक सदस्यों में डायाबिटीज के कारण किडनी डिजीज हुई हो।
मधुमेह से किडनी रोग के लक्षण -
बढ़ते मधुमेह से किडनी का खरब होना लाज़मी हैं। शुरूआती समय में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जाँच द्वारा इसकी पहचान हो सकती हैं। यदि पेशाब की जाँच में पेशाब में आल्ब्यूमिन (प्रोटीन) पाया जाएं तो यह किडनी ख़राब होने की पहली और शत प्रतिशत निशानी हैं।
धीरे-धीरे खून का दबाव बढ़ता है और साथ ही पर और चेहरे पैर सूजन आने लगती है।
रक्त में किसी प्रकार का बदलाव जैसे - गाढ़ा होना, रक्त का धक्का लगना, रंग में परिवर्तन आदि। 
अचानक या लगातार रक्त में शकर की कमी होना जिससे दवा और इन्सुलिन की मात्रा में कमी। इस थिति में रोगी को लगता हैं की उसका शुगर अब काबू में आ गया हैं। लेकिन यह किडनी ख़राब होने का एक साफ संकेत हैं।
मधुमेह के कारण आँखों में दिक्कत आना। यह संकेत हैं की आपकी किडनी जल्द ही ख़राब होने वाली हैं।
मधुमेह से बचाव :-
दुनिया में कोई भी रोग हो उसका उपचार पहले से ही मौजूद हैं। बशर्ते उस उपचार को सही तरीके से अपनाया जाए। लेकिन सही दिनचर्या अपना कर रोगो से दूर रहना ही सही उपाय हैं। मधुमेह होने पर हम निम्नलिखिल उपायों से इस जानलेवा बीमारी से मुक्ति पा सकते हैं और अपनी किडनी को भी ख़राब होने से बचा सकते हैं।
शरीर में शकर पर और रक्तचाप पर नियंत्रण,
मधुमेह की पहचान होते ही चरण उपचार शुरू करे, 
रक्त में अचानक चीनी की मात्रा की कम दिखाई दें तो तुरंत किडनी की जांच कराए, 
जीवनशैली में तुरंत बदलाव करे। रोजाना व्यायाम, सैर करना शुरू करे। एक दिन में दो से तीन किलोमीटर की सैर जरूर करे। हो सके तो इस क्रिया को सुबह और शाम करे,
कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। भोजन में मीठे को बिलकुल खत्म कर दें। सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपने भोजन में शामिल कीजिये। इसके अलावा फाइबर का भी सेवन करना चाहिए,
नमक और चीनी की मात्रा कम ले। डिब्बा बंद जूस का सेवन बिलकुल ना करे। मिठाइयों और तले हुए भोजन से दुरी बनाएं,
धूम्रपान और शराब का सेवन कम कर दें या संभव हो तो बिलकुल छोड़ दें, 
दफ्तर के काम की ज्यादा टेंशन नहीं रखें और रात को पर्याप्त नींद लें। कम नींद सेहत के लिए ठीक नहीं है। तनाव को कम करने के लिए आप ध्यान लगाएं या संगीत आदि सुनें।
मधमेह से निदान पाने के घरेलु उपाए :-
हम घरेलु उपायों की मदद से मधुमेह पर आसानी से नियंत्रण पा सकते हैं। हम आपको कुछ घरेलु नुख्से यहाँ बता रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने शुगर को काबू में रख सकते हैं। "ध्यान दें, इन उपायों के साथ दवाओं का सेवन एक दम बंद ना करे"।
गेहूं और जौ की लगभग बराबर मात्रा ले साथ में उनके अकेले की मात्रा से आधे चने को मिला एक साथ पिसवा ले। और इसी आटे से बानी रोटियां का सेवन करे। उदाहरण के लिए दो की गेहूं ले तो एक किलो जौ ले और आधा किलों चना ले। 
मधुमेह के रोगियों को अपने भोजन में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रौकोली, टमाटर, बंद गोभी और दूसरी अन्य पत्तेदार सब्जियों का सेवन शुरू करना चाहिए। मांसाहार से दुरी बनाएं रखने की कोशिश करे। हो सके तो इसे एक दम त्याग दे।
मीठे को नियंत्रण में रखने के लिए रोगी को जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती जैसे फलों का सेवन अच्छा रहता हैं। ध्यान दें आम, केला, सेब, चीकू , खजूर और अंगूर जैसे फलों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए इन फलों में मीठे की अधिक मात्रा होती हैं।
हम कुछ मसलों की मदद से भी शुगर को नियंत्रण में रख सकते हैं। जैसे 
करी पत्ता -  करी पत्ते से लगातार सेवन से आपके शरीर में इंसुलिन की प्रक्रिया नियंत्रित रहती है। रक्त में ग्लूकोज़ लेवल नहीं बढ़ता साथ ही वजन और कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रण में रहता हैं।
अदरक - अदरक  के सेवन से आपका रोजाना बढ़ने वाला शुगर कम होता हैं। आप इसे सीधा या भोजन में डाल कर खा सकते हैं।
लहसुन - आप रोजाना लहसुन की दो कलि कहते हैं तो आपका शुगर कभी अपना सर नहीं उठा सकता। जब लहसुन को पीसा या कुचला जाता है, तो इसमें से एलिसिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट निकलता है। यह तत्व एंटीडायबिटिक होता है, जो मधुमेह को प्रभावी ढंग से रोकने में मदद करता है।

लाल शिमला मिर्च रखे रोगमुक्त 
शिमला मिर्च बाजार में हमे पुरे साल उपलब्ध होती हैं। यह बच्चों के साथ बड़ों को भी कुछ खास पसंद नहीं होती। लेकिन यह हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होती हैं। खास कर लाल शिमला मिर्च, जिसे हम अंग्रेजी में "Red Bell Peppers" कहते हैं। लाल शिमला मिर्च हमारे शरीर के लिए कई मायनों में अच्छी हैं। क्यूंकि इसमें बिलकुल भी कैलोरी नहीं होती। लाल शिमला मिर्च किडनी रोग के निदान में भी बहुत फायदेमंद होती हैं। 
शिमला मिर्च के पौष्टिक तत्व और रोगो से निदान  :-
लाल शिमला मिर्च में पोटैशियम की मात्रा बहुत कम होती हैं लेकिन यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होती हैं। लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं हैं की लाल शिमला मिर्च किडनी को स्वस्थ रखने के लिए एकदम सही आहार हैं। यह स्वादिष्ट सब्जी अकेले विटामिन सी और विटामिन ए, साथ ही विटामिन बी6, फोलिक एसिड और फाइबर का एक उत्तम स्रोत हैं। इसके साथ ही लाल शिमला मिर्च कुछ कैंसर के रोगो से भी आपको बचाने में मदद करता हैं, क्योंकि इसमें लाइकोपीन होता है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट है जो कुछ कैंसर से बचता हैं। 
किडनी रोगो से निदान के साथ-साथ लाल शिमला मिर्च हमें हार्ट प्रॉब्लम और मोतियाबिंद से भी बचाता हैं। क्यूंकि इसमें आयरन, विटामिन, बीटा कैरोटीन आदि भरपूर मात्रा में होता है। यह त्वचा से चकत्ते और उम्र के धब्बो की रोकथाम में भी मददगार हैं। ज्ञात हो की किडनी फेल्योर के दौरान रोगी के शरीर के निचले हिस्से में सूजन की शिकायत होती हैं। लाल शिमला मिर्च सूजन को कम करने में आपकी मदद करती हैं। लाल शिमला मिर्च में अद्भुत एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। जो `सूजन और ऑटो प्रतिरक्षा रोगों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से लाभप्रद होता है।
कैसे खाएं शिमला मिर्च :-
आप लाल शिमला मैच को कई प्रकार से खा सकते हैं। आप इसकी सब्जी बनाने से लेकर और भी तरह से खा सकते हैं। आप लाल शिमला मिर्च को कच्चा किसी चटनी के साथ खा सकते हैं। और इसे टूना मछली और चिकेन से बनने वाले सलाद में भी प्रयोग कर सकते हैं। आप इसे अपने सैंडविच में, सलाद में और ऑमलेट में भी खा सकते हैं।
1/2 कप लाल शिमला मिर्च = 1 मिलीग्राम सोडियम, 88 मिलीग्राम पोटेशियम, 10 मिलीग्राम फॉस्फोरस

छोटे से लहसुन के बड़े फायदे 
लहसुन खाना हमारे लिए काफी फायदेमंद हैं, इस बात से हम सभी वाक़िफ़ हैं। इसी कारण भारत में लहसुन का प्रयोग बड़े स्तर पर किया जाता है। वेदों में इसे तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। वेदों के अनुसार लहसुन का सेवन राक्षक करते है। प्राय: देखा जाता है कि हिन्दुओं में व्रत या फिर किसी शुभ कार्य के लिए बनाए गए भोजन में भी प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता क्योंकि इन्हें शुद्ध शाकाहारी नहीं माना जाता। बावजूद इसके यह एक गुणकारी औषधि है, इसी कारण इसे आयुर्वेद में एक खास स्थान प्राप्त है। लहसुन अन्य रोगो के साथ-साथ किडनी रोग से मुक्ति पाने में भी काफी उपयोगी है।
लहसुन के फायदें :-
लहसुन आपके दांतों पर पिली रंग या किसी अन्य रंग की परत बनने से रोकने में मदद करता हैं। 
यह शरीर में लगातार बढ़ रहे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रख उसे बढ़ने नहीं देता।
इसके सेवन से दिल की बीमारिया नहीं होती। दरअसल लहसुन ब्लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। 
यह रक्तचाप को भी नियंत्रण में रखता है। यदि आपको हाई बीपी की शिकायत यह तो लहसुन खाना शुरू करे।
इसके सेवन से पाचनतंत्र को मजबूत बनाता है। जिसके कारण आपको पेट संबंधित रोग नहीं होते। जैसे - डायरिया और कब्ज ।
यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद हैं। जब लहसुन को पिसा या कुचला जाता हैं, उस दौरान इसमें से एलिसिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट निकलता हैं। यह तत्व शरीर में शुगर नहीं बढ़ने देता। किडनी ख़राब होने का सबसे बड़ा कारण मधुमेह हैं।
बिना कोई मेहनत भरा काम किये शरीर में आने वाली सूजन को रोकता हैं। आपको बता दें की किडनी ख़राब होने की स्थिति में रोगी के शरीर के निचले हिस्सों में अक्सर सूजन आ जाती हैं। जिसे लहसुन होने से रोकता हैं।
कैसे खाएं :-
लहसुन खाने में एक अलग प्रकार का स्वाद उतपन्न करता है। आप इसे कई प्रकार से अपने प्रयोग में ला सकते है, जैसे -
आप इसकी रोजाना दो कलियाँ भी खा सकते हैं।
यदि आपको लहसुन को कच्चा खाना पसंद नहीं हैं, तो आप इसे सब्जी या किसी अन्य प्रकार के व्यंजन में  इसका प्रयोग कर सकते हैं।
आप इसे पास्ता, मीट, ब्रेड (गार्लिक ब्रेड), सलाद में भी खा सकते है।
आप लहसुन का अचार भी बना कर खा सकते है। अचार बनने के बाद इसके गुणकारी तत्वों पर कोई असर नहीं पड़ता लेकिन यह खाने में और भी स्वादिष्ट हो जाता है। 
पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्ज से आराम मिलेगा।





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